दोस्तों ,
हम सभी का सपना होता है  एक अपना घर होना और वो घर तब सपनो का घर हो जाता है जब वो घर पूरे परिवार के लिए शुभ हो | और इसका सबसे सरल तरीका है वास्तुशास्त्र | आज हम सबसे  पहले आपको वास्तुशास्त्र और इसके फायदों से अवगत करते है क्योंकि किसी भी चीज़ को अपनी लाइफ में लाने से पहले उसके बारे में जान लेना जरुरी होता है |
वास्तुशास्त्र क्या है --
वास्तुशास्त्र भारत का ही एक पुराना विज्ञान है | इसके बहुत साधारण से नियम हैं जो भवन निर्माण के बारे में सही जानकारी देते हैं | भारत का यह विज्ञान ७००० साल पुराना है |  वास्तुशास्त्र हमें ये बताता है कि जब भी हम भवन निर्माण के लिए कोई भूमि पसंद कर रहे हों तो हमे किन बातो का ध्यान रखना चाहिए | संस्कृत में "वास्तु" का  अर्थ होता है "भवन निर्माण " और "शास्त्र " का अर्थ होता हैं "विज्ञान"|  इसके सिद्धांत वातावरण में जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश तत्वों के 
बीच एक सामंजस्य स्थापित करने में मदद करते हैं। जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश इन पाँचों तत्वों
का हमारे कार्य प्रदर्शन, स्वभाव, भाग्य एवं जीवन के अन्य पहलुओं पर पड़ता है।
            जब भी आपको कोई  भी संपत्ति खरीदनी हो या किराये पर भी लेनी हो तो एक बार वास्तु का विचार                   अवश्य कर लेना चाहिए|
वास्तुशास्त्र में दिशाएं क्यों जरुरी होती हैं --
             ऐसा माना जाता है कि अलग अलग ग्रह अलग अलग दिशाओं के स्वामी होते हैं और भूमि या मकान
पर अपने अलग अलग प्रभाव डालते हैं | इन दिशाओं को समझ कर इन प्रभावों को अपने अनुकूल किया जा सकता है|

इसके अंतर्गत दिशाओं को आधार बनाकर आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जाओं को कुछ इस तरह सकारात्मक किया जाता है, ताकि वह मानव जीवन पर अपना प्रतिकूल प्रभाव ना डाल सकें।

वास्तुशास्त्र रोजमर्रा के जीवन में कितना आवश्यक --
वास्तु एक प्राचीन विज्ञान है। हमारे ऋषि मनीषियो ने हमारे आसपास की सृष्टि मे व्याप्त अनिष्ट शक्तियो से हमारी रक्षा के उद्देश्य से इस विज्ञान का विकास किया। वास्तु का उद्भव स्थापत्य वेद से हुआ है, जो अथर्ववेद का अंग है। इस सृष्टि के साथ साथ मानव शरीर भी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है और वास्तु शास्त्र के अनुसार यही तत्व जीवन तथा जगत को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक है। भवन निर्माण मे भूखंड और उसके आसपास के स्थानों का महत्व बहुत अहम होता है। भूखंड की शुभ-अशुभ दशा का अनुमान वास्तुविद् आसपास की चीजो को देखकर ही लगाते है। भूखंड की किस दिशा की ओर क्या है और उसका भूखंड पर कैसा प्रभाव पड़ेगा, इसकी जानकारी वास्तु शास्त्र के सिद्धांतो के अध्ययन विश्लेषण से ही मिल सकती है। इसके सिद्धांतो के अनुरूप निर्मित भवन मे रहने वालो के जीवन के सुखमय होने की संभावना प्रबल हो जाती है। हर मनुष्य की इच्छा होती है कि उसका घर सुंदर और सुखद हो, जहां सकारात्मक ऊर्जा का वास हो, जहां रहने वालों का जीवन सुखमय हो। इसके लिए आवश्यक है कि घर वास्तु सिद्धांतो के अनुरूप हो और यदि उसमे कोई वास्तु दोष हो, तो उसका वास्तुसम्मत सुधार किया जाए। यदि मकान की दिशाओ मे या भूमि मे दोष हो तो उस पर कितनी भी लागत लगाकर मकान खड़ा किया जाए, उसमे रहने वालो की जीवन सुखमय नहीं होता।

कौन सी दिशा किसके बारे में बताती है --
यह जानना बहुत आवश्यक है कि कौन सी दिशा किसे represent करती है | 
पूर्व-East is for male issues, wealth and wisdom
पश्चिम -West is for prosperity, fame and name and also for the head male member.
उत्तर -North is for female issues, wealth and prosperity.
दक्छिण -South is for the head female member and represents wealth and happiness. 

वास्तुशास्त्र में मुख्य दिशाएं और उनके ग्रह स्वामी --



आज वास्तु शास्त्र में बस इतना ही , अगले ब्लॉग में हम आपको बताएँगे किस प्रकार आपके घर की चहारदीवारी  भी आपके मंगल को अमंगल में बदल सकती है।

https://redesignn.blogspot.com/2020/04/blog-post_87.html


Comments

  1. Very nice abhijeet. I hope in future we got to know something more about vastu.👌👌👌👌

    ReplyDelete
  2. thnks for showing interest in my blog.. surely i will try to give my best...

    ReplyDelete
  3. Excellent sir,I really like it very much. I'm waiting for your next Blog

    ReplyDelete
  4. Good to know the history behind. Nice. Expecting more knowledge from your side.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

घर की दीवारें और कमरों के रंग वास्तु के अनुसार