घर की दीवारें और कमरों के रंग वास्तु के अनुसार
दोस्तों,
जैसा कि मैंने आप लोगों से
वादा किया था कि मैं घर की दीवारों को लेके एक ब्लॉग लाऊँगा तो मैं एक नयी जानकारी
के साथ हाजिर हूँ | क्या आप
जानते हैं कि घर की दीवारें तो वास्तु से जुड़ी ही होती हैं पर उनसे आपकी किस्मत भी
जुड़ी होती है ….
जी, सही सुना आपने | घर
की दीवारों की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई और उनके रंग भी आपकी
किस्मत बना भी सकते हैं और बिगाड़ भी | आपने वास्तु में अक्सर
घर के अंदर के दोष और उनके निवारण के बारे मेँ पढ़ा और सुना होगा पर यहाँ पर मैं
आपको बताऊंगा कि कैसे आपके घर का प्रवेश द्वार और उसकी बनावट भी आपके शारीरिक और
मानसिक दोनों बातों पर गहरा असर डालती है |
दीवारों की ऊंचाई
और मोटाई का असर--
घर की बाहरी चारदीवारी की ऊंचाई घर के प्रवेश
द्वार की ऊंचाई से तीन चौथाई से ज्यादा होनी चाहिए | पश्चिम और दक्षिण दिशाओं की दीवारों की ऊंचाई उत्तर और पूर्व दिशाओं की दीवारों की तुलना में
30 सेमी.अधिक होनी चाहिए। पश्चिम और दक्षिण दिशाओं की दीवारें उत्तर और पूर्व दिशाओं की चारदीवारों से अधिक मोटी भी होनी चाहिए| इसका
सीधा असर ये पड़ता है कि जो पॉज़िटिव ऊर्जा घर मे मौजूद है वो अंदर ही रहेगी और
पश्चिम और दक्षिण से आने वाली नेगेटिव ऊर्जा दीवारें मोटी होने के कारण बाहर ही रह
जाएंगी |
दीवारें सही सलामत
हों तो बेहतर—
भवन की दीवारें कहीं से भी टूटी फूटी नही होनी
चाहिए, ना ही दरार होनी चाहिए और ना ही रंग उखड़ा हुआ होना चाहिए क्यूकि यदि ऐसा है,तो वहां रहने वाले सदस्यों के जोड़ों में दर्द,
गठियाँ, साइटिका, कमर दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कोनों में मकड़ी के जाले नहीं लगें,ये तनावपूर्ण और निराशाजनक माहौल को जन्म देते हैं
।
घर
के अंदर की दीवारें और उनके रंग का महत्व—
घर की दीवारों पर नया रंग आपको उत्साह से भर देता है , लेकिन अगर ये रंग घर के वास्तु को ध्यान में रख कर किये जाएं तो बेहद सकारात्मक और आश्चर्यजनक परिणाम पाए जा सकते हैं |
एक भारतीय परिवार में लगभग 9 कमरे हो सकते हैं --
1 ) प्रवेश कक्ष यानि दरवाजे से अंदर आते ही पड़ने वाला सबसे पहला कमरा
2 ) बैठक कक्ष यानि लिविंग रूम
3 ) भोजन कक्ष
4 ) मुख्य शयन कक्ष
5 ) बच्चों का कमरा
6 ) रसोई घर
7 ) पूजा घर
8 ) अध्ययन कक्ष
9 ) स्नान घर
इन सभी कमरों में कैसे रंग वास्तु के हिसाब से होने चाहिए मैं आपको एक एक करके बताता जाता हूँ --
1 ) प्रवेश कक्ष में सफ़ेद ,हल्का हरा ,गुलाबी या नीला रंग कराना शुभ परिणाम देता है |
2 ) बैठक कक्ष यानि लिविंग रूम में हमेशा पीला,मटमैला ,भूरा ,हरा रंग शुभ होता है |
3 ) भोजन कक्ष में आप हरा,नीला या हल्का गुलाबी हल्के रंगों का प्रयोग कर सकते हैं ,ये रंग शुभ परिणाम देते हैं |
4 ) मुख्य शयन कक्ष में हरा ,नीला,हल्का गुलाबी या हल्के रंगो का प्रयोग सही होता है जो वास्तु के अनुसार शुभता प्रदान करते हैं |
5 ) बच्चों का कोई कमरा हो या बच्चो को जहाँ सुलाया जाता हो वहां की दीवारों पर काला ,नीला या हरा रंग शुभ होता है |
6 ) रसोई घर यानि किचन में हमेशा शांतिदायक सफ़ेद रंग है जो वहां की ऊर्जा को सकारात्मकता प्रदान करता है |
7 )पूजा व अध्यात्म से सम्बंधित कमरे में गुलाबी ,काला,हरा,लाल रंग शुभ माना जाता है |
8 ) अध्ययन कक्ष या जहाँ पर भी आप लिखा पढ़ी का काम करते हैं उसमें हरा,लाल,गुलाबी,नीला,हल्का भूरा या हल्के रंग शुभ होते हैं |
9 ) स्नानघर यानि बाथरूम का अंदरूनी रंग गुलाबी,काला,स्लेटी या सफ़ेद हो तो वह शुभता या सकारात्मकता प्रदान करता है |
दिशा के आधार पर घर की दीवारों के रंग—
पूर्व दिशा में ---- हल्का नीला या सफ़ेद रंग
पश्चिम दिशा में ----ऐसा माना जाता है कि ये जगह जल से सम्बंधित होती है इसलिए इस दिशा के लिए सफ़ेद या नीला रंग सबसे सही होता है |
उत्तर दिशा में -- हल्का पिस्ता या हरा रंग
दक्षिण दिशा में ----पीला या लाल रंग
उत्तर पूर्व दिशा में ---- हल्का नीला
उत्तर पश्चिम दिशा ---ऐसा माना जाता है कि ये दिशा हवा से सम्बंधित होती है इसी कारण इस दिशा के लिए हल्का स्लेटी,सफ़ेद और क्रीम रंग उपयुक्त होता है |
दक्षिण पश्चिम दिशा ---इस दिशा के लिए मिटटी के रंग या हल्का ब्राउन रंग शुभ होता है |
दक्षिण पूर्व दिशा ---ऐसा माना जाता है कि ये दिशा अग्नि से सम्बंधित होती है इसलिए इस दिशा के लिए सिल्वर,गुलाबी या ऑरेंज रंग शुभ होता है |
दोस्तो आज के लिए बस इतना ही | मैं आपको अपनी पिछली पोस्ट की लिंक भी यहाँ
दे रहा हूँ | आप इस पर क्लिक करके मेरी पिछली पोस्ट से भी
जरूरी जानकारी ले सकते हैं |


Great. Never knew this. Thanks
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